Saturday, July 18, 2009

तुम कौन हो ??






















तुम कौन हो ??
तुम हो कौन ? जो मुझसे बिना पूछे मुझे पढ़ रहे हो !
पढ़ती तो दुनिया है , पर कोई समझ पाया है !
जो तुम समझ लोगे ?


कभी ख़ुद को पढ़ पाए हो ?
पैसा , प्यार , सफलता पाकर तुम सोचते हो ,
तुमने दुनिया जीत ली , जीवन का मर्म पा लिया हो !
पर शायद तुम्हें मेरी गरीबी और अकेलेपन पर हँसी आ रही होगी ?


पर फिर पूछता हूँ !
" क्या ख़ुद को आज तक पढ़ पाए हो ? "
एक पन्ना भी खोल के देखा है ?
और बात करते हो जीवन की ,दुनिया चलते हो !
क्या अपने मन की दुनिया में एक कदम भी चल पाए हो ?
या सीधे कहू तुम्हारी भाषा में तो " जिंदगी में कुछ कर पाए हो ? "


शायद कुछ सोच रहे हो ,
की तुम तो किसी पागल कवि की कविता ,पढ़ रहे थे .....
पर ये सब क्या है .....
शायद में तुम्हें भ्रमित कर रहा हूँ ,
तुम्हें दुनिया की भीड़ से अलग करना चाहता हूँ !
या
फिर वाकई में तुम्हारी चेतना को जगाना चाहता हूँ !


सारी जिंदगी तुमने दूसरो को पढने में बिता दी ,
ख़ुद को कभी छू भी नही पाये हो !
मुझे लगता है ,जिस दिन तुम
भ्रम और चेतना के फर्क को समझ जाओगे !
उस दिन अपने आप को समझ जाओगे !

कि तुम कौन हो ??




"कठोर "

1 comment:

Unknown said...

Time nhai hai kud ko padne
Jindgi very fast hai
Aur smajna to door ki bat hai
Phir bhi kosish karte reho
Shyad tumhe vo mil jaye jo hum mai se kisi ko nahi mila.