क्या है सही और सच ?? दिल से दिल की बात बता कर तो देखो,शायद इस कोशिश का नाम है "कठोर मिलन"
Tuesday, May 19, 2009
जिंदगी को कलम और कलम को जिंदगी बनाना....
* दिनों के फासले कभी प्यार को कम ना कर पाए है !
वो अलग बात है दिलो के फासले ही दिन बन गए है !!
* या खुदा क्या खूब तुने "प्यार " चीज़ है बनाई !
रिश्तो का नाम देकर ,क्यों झूठी आस बंधाई !
पहले प्यार से रिश्ते बनाये ,पर अब उन रिश्तों में ही "प्यार " नही !!
* प्यार किया था हमने भी एक दिन !
पर नही था मालूम कि समझने में सदिया लग जाएँगी !
कभी प्यार को हमसफ़र समझते रहे , तो कभी हमसफ़र को प्यार समझते रहे !!
* प्यार की जीत तब है , जब आप किसी से हार जाए !
आपकी हार तब है , जब आप किसी को प्यार से जीत ना पाए !!
* शीशे की तरह दिल तोड़ के चले गए !
पहले आदत बन , फ़िर छोड़ चले गए !
जोड़ कर फ़िर बनाऊंगा उम्रभर , आइना इस "दिल" का !
आईने से फ़िर रूबरू कराकर पूछुंगा , हाल तुम्हारे दिल का !!
कवि "कठोर"
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1 comment:
kya karoge es jalim dil ka
berbad ho jaoge agar eski sunoge
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