शायद मैं तुम्हें भूल रहा हू ,
तुम मरे घर के समतल स्थानों की शोभा हो ,
दीवार , मेज , शीशे -पर लगा तुम्हें याद नही करता हू ,
पर शायद कंप्यूटर के सामने आते ही टूट जाता हू ,
यकीन करो मेरा मैं तुम्हें भूल रहा हू !!
लगता है तुम्हारी आँखें मुझे उत्सुकता से देखती है ,
कुछ कहना चाहती है शायद "सही या ग़लत " के बारे में ,
फिर वही बात दोहराना चाहती है !
खेलता हू टकटकी लगाने का खेल ,
पर हमेशा की तरह ,आज भी हार रहा हू !
तुम आँखें बंद ही नही करती हो ,
जैसे हर वक्त मुझे देखती रहती हो ,
पर में तुम्हें भूल रहा हू !!
होंठ तुम्हारे कुछ बयां करने की फिराक में है ,
खीचते है मुझे तुम्हारी तरफ़ प्रिये !
पर हर बार की तरह भूल जाता हू , कि तुम एक तस्वीर हो ,
अच्छा लगता है जब मैं जी भर के तुमसे कहता हू ,
और तुम मूक की तरह मुझे निहारती हुई , मेरी बात सुनती हो !
तुम कभी -भी कुछ नही बोलती , तब डरता है ये कुंठित मन ,
कि कही ये तस्वीर भी तुम्हारी तरह पत्थर तो नही ?
कलम चल रही है , पर नज़र तुमसे हटती नही !
पर मैं तुम्हें भूल रहा हू !!
एक एहसान था तुम्हारा " मुझे" मरने का -
वर्ना "मैं " पैदा नही होता !
पर शायद " मैं " और " मुझे" कि आत्मा एक है -
ये बात तुम्हारी समझ से बहुत परे थी !!
आज मैं " मैं " हू - परिपूर्ण , असीम ऊर्जा से भरा हुआ -
इसलिए मैं तुम्हें भूल रहा हू !!
अब लोगो ने मुझे पहचानने से भी इंकार कर दिया है,
अकेला हू - मैं भी तो एक सच हू !
अभी छोटा हू इस बड़ी दुनिया में , मजबूर हू , दूर हू ;
बुझा सा मन है .......
पर अब भी मेरे इंतज़ार में पूरा " जीवन "है !
प्रिये पर मैं तुम्हें भूल रहा हू !!
इस कविता के अंत तक मैं तुम्हें भूल जाऊंगा ,
अनकहे शब्दों में अपनी बात कह जाऊंगा ,
पर तुम्हारी आँखों को कभी भूल ना पाउँगा ,
वो गालो कि लाली को ,खून से निकाल ना पाउँगा ,
तेरी सबसे बदसूरत तस्वीर बना दिल में बसाऊंगा ,
शायद इसी तरह मैं तुझे भूल पाउँगा !!
तुम मानो या न मानो दिल से कोशिश जारी है ,
याद ना आए इसलिए तस्वीरो कि मंजिल दीवारें है,
और कंप्यूटर पर भी तुम्हारा ही स्क्रीनसेवर है ,
अब मुझे तुम्हारा जन्मदिन २३ अक्टूबर भी याद नही है ,
तुम्हारा फ़ोन नम्बर -९४५०५०७०६९ भी मुझे याद नही है ,
तुम्हारी वो दोस्त कि बात , मुलाकात , स्कूल कि याद !
मुझे बिल्कुल याद नही !!
वो रातों में बातों पर मुस्कुराना , फ़ोन मिलाना , रूठना और मनाना , सुबह में सोना ;
और फिर सारा दिन याद करना !
मुझे याद नही है ! .......मेरा यकीन करो मुझे कुछ भी याद नही है !
" में तुम्हें भूल चुका हू "
" कठोर "

3 comments:
awesome ....creation ...i had ever seen !!!
mujhe nahi lagta "kathor " sahab aap usse kabhi bhool payenge !!!!
Khoshish jari hai ...usse kabhi na yaad ane ki aur bhulane ki !!
wow aab to shabd bhi nhai hai kya kahun
Bholna etna asaan hota to aaj dunia mai kavi nahi hote
sayad aise hi kavi bante hai
hum jaise shrif padh kar re jate hai
aur kahte hai aree "bilkul mere dil ka hal hai"
thumhe kaise pata
and that is called "Kavi"
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